नीति निपुण निंदा करें या प्रशंसा करें, लक्ष्मी आए चाहे चली जाय, मृत्यु चाहे आज ही हो जाए, चाहे एक युग के बाद, परन्तु धीर पुरूष न्यायमार्ग से एक पग भी विचलित नहीं होते। - भर्तृहरी